किसानों ने रोकी नेशनल हाईवे के निर्माण की रफ्तार, पांच फ्लाईओवर पर काम भी नहीं हो सका शुरू


कुंडली के पास नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण का अधूरा पड़ा कार्य
– फोटो : Sonipat

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अंकित चौहान
सोनीपत। नेशनल हाईवे-44 के चौड़ीकरण के निर्माण कार्य की रफ्तार को किसानों ने रोक दिया है। इससे हालात यह है कि पांच फ्लाईओवर बनाने का काम शुरू भी नहीं हो सका। बता दें कि पहले ही इस नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण में दो साल की देरी हो चुकी है जो अप्रैल 2019 में पूरा होना था लेकिन अभी तक केवल 60 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो सका है। वहीं अब किसान आंदोलन को देखते हुए एनएचएआई के अधिकारियों ने नेशनल हाईवे चौड़ीकरण का कार्य पूरा होने में एक साल से ज्यादा समय लगने की बात कही है।
पहले कंपनी बदलने के कारण हुई देरी, अब किसान आंदोलन बना बाधा
दिल्ली-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे मुकरबा चौक से सिंघु बॉर्डर तक पहले आठ लेन बना हुआ था, जबकि उससे आगे छह लेन का नेशनल हाईवे था। इस नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक बढ़ने के कारण छह लेन से आठ लेन की सड़क के साथ दो-दो लेन की सर्विस रोड बनाई जाने का प्लान तैयार किया गया। वर्ष 2015 में पीएम नरेंद्र मोदी से शिलान्यास कराया गया। इसका चौड़ीकरण दिल्ली से पानीपत तक 70.5 किलोमीटर तक होना है। जिसका ठेका एस्सेल कंपनी को दिया गया था। इसके चौड़ीकरण की समयावधि अप्रैल 2019 तक रखी गई थी और इस पर 2129 करोड़ रुपये खर्च होने है जो एस्सेल कंपनी को बिल्ड ऑपरेशन एंड ट्रांसफर मोड (बीओटी) के आधार पर खर्च करने थे। निर्माण अवधि से लेकर 17 साल तक कंपनी टोल वसूलेगी, लेकिन एस्सेल कंपनी निर्धारित समय तक केवल 40 प्रतिशत काम ही कर सकी थी और उसके बाद काम ठप कर दिया गया था। जिसको देखते हुए एनएचएआई ने एस्सेल कंपनी का ठेका रद्द करके पिछले साल वेलस्पन को चौड़ीकरण की जिम्मेदारी सौंपी। कंपनी ने तेजी से काम शुरू किया था और उसने पानीपत व राई के बीच में कई फ्लाईओवर को शुरू कर दिया है लेकिन अब किसान आंदोलन नेशनल हाईवे निर्माण की रफ्तार में रोड़ा बन गया है और राई से दिल्ली के बीच काम पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है।
दिल्ली से पानीपत तक नेशनल हाईवे चौड़ीकरण का काम शुरू होने के बाद सड़क को जगह-जगह से खोदकर छोड़ दिया गया है और केजीपी-केएमपी गोल चक्कर से कुंडली तक ज्यादा हालात खराब हैं। उस बीच में पांच फ्लाईओवर बनने हैं, जिनमें सिंघु बॉर्डर, कुंडली, निफ्टम चौक, प्याऊ मनियारी, ड्रेन नंबर 8 शामिल हैं। इन जगहों पर फ्लाईओवर का कार्य शुरू भी नहीं हो सका है और किसान आंदोलन के कारण काम शुरू होता भी नहीं दिख रहा है। किसान चार महीने से ज्यादा समय से कुंडली बॉर्डर से राई तक जगह-जगह डेरा डालकर बैठे हैं, जिससे वहां काम शुरू नहीं कराया जा सकता है। किसानों के नेशनल हाईवे से उठने के बाद ही काम शुरू कराने की बात कही जा रही है, जिससे एक साल का समय नेशनल हाईवे का निर्माण पूरा होने में लगेगा।
ग्रामीण-वाहन चालक हो रहे परेशान
नेशनल हाईवे पर करीब एक लाख वाहन प्रतिदिन गुजरते हैं, लेकिन इस समय किसान आंदोलन के कारण वाहन कुछ कम हैं। इसके बावजूद नेशनल हाईवे से वाहनों की कतार खत्म नहीं होती। वहीं नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण का कार्य अधूरा पड़ा होने से आसपास के ग्रामीणों व वाहन चालकों को परेशानी उठानी पड़ रही है। कंपनी ने राई से पानीपत के बीच जिन फ्लाईओवर को शुरू कर दिया है तो उनके नीचे से वाहनों के निकलने के लिए रास्ता नहीं खोला गया है। इस कारण वाहन चालकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। हाईवे पार करने के लिए लोगों को आधा-आधा घंटा तक वाहनों के गुजरने का इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनकी जिंदगी को खतरा बना रहता है।
नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा था, लेकिन किसान आंदोलन के कारण राई से दिल्ली के बीच के पांच फ्लाईओवर पर कार्य भी शुरू नहीं हो सका है। जिस तरह के हालात है, उससे लग रहा है कि चौड़ीकरण का कार्य पूरा होने में एक साल से ज्यादा समय लगेगा। यह जरूर है कि अगर किसान आंदोलन नहीं होता तो इस साल के अंदर ही काम पूरा कर लिया जाता। – आनंद दहिया, तकनीकी मैनेजर, एनएचएआई

अंकित चौहान

सोनीपत। नेशनल हाईवे-44 के चौड़ीकरण के निर्माण कार्य की रफ्तार को किसानों ने रोक दिया है। इससे हालात यह है कि पांच फ्लाईओवर बनाने का काम शुरू भी नहीं हो सका। बता दें कि पहले ही इस नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण में दो साल की देरी हो चुकी है जो अप्रैल 2019 में पूरा होना था लेकिन अभी तक केवल 60 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो सका है। वहीं अब किसान आंदोलन को देखते हुए एनएचएआई के अधिकारियों ने नेशनल हाईवे चौड़ीकरण का कार्य पूरा होने में एक साल से ज्यादा समय लगने की बात कही है।

पहले कंपनी बदलने के कारण हुई देरी, अब किसान आंदोलन बना बाधा

दिल्ली-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे मुकरबा चौक से सिंघु बॉर्डर तक पहले आठ लेन बना हुआ था, जबकि उससे आगे छह लेन का नेशनल हाईवे था। इस नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक बढ़ने के कारण छह लेन से आठ लेन की सड़क के साथ दो-दो लेन की सर्विस रोड बनाई जाने का प्लान तैयार किया गया। वर्ष 2015 में पीएम नरेंद्र मोदी से शिलान्यास कराया गया। इसका चौड़ीकरण दिल्ली से पानीपत तक 70.5 किलोमीटर तक होना है। जिसका ठेका एस्सेल कंपनी को दिया गया था। इसके चौड़ीकरण की समयावधि अप्रैल 2019 तक रखी गई थी और इस पर 2129 करोड़ रुपये खर्च होने है जो एस्सेल कंपनी को बिल्ड ऑपरेशन एंड ट्रांसफर मोड (बीओटी) के आधार पर खर्च करने थे। निर्माण अवधि से लेकर 17 साल तक कंपनी टोल वसूलेगी, लेकिन एस्सेल कंपनी निर्धारित समय तक केवल 40 प्रतिशत काम ही कर सकी थी और उसके बाद काम ठप कर दिया गया था। जिसको देखते हुए एनएचएआई ने एस्सेल कंपनी का ठेका रद्द करके पिछले साल वेलस्पन को चौड़ीकरण की जिम्मेदारी सौंपी। कंपनी ने तेजी से काम शुरू किया था और उसने पानीपत व राई के बीच में कई फ्लाईओवर को शुरू कर दिया है लेकिन अब किसान आंदोलन नेशनल हाईवे निर्माण की रफ्तार में रोड़ा बन गया है और राई से दिल्ली के बीच काम पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है।

दिल्ली से पानीपत तक नेशनल हाईवे चौड़ीकरण का काम शुरू होने के बाद सड़क को जगह-जगह से खोदकर छोड़ दिया गया है और केजीपी-केएमपी गोल चक्कर से कुंडली तक ज्यादा हालात खराब हैं। उस बीच में पांच फ्लाईओवर बनने हैं, जिनमें सिंघु बॉर्डर, कुंडली, निफ्टम चौक, प्याऊ मनियारी, ड्रेन नंबर 8 शामिल हैं। इन जगहों पर फ्लाईओवर का कार्य शुरू भी नहीं हो सका है और किसान आंदोलन के कारण काम शुरू होता भी नहीं दिख रहा है। किसान चार महीने से ज्यादा समय से कुंडली बॉर्डर से राई तक जगह-जगह डेरा डालकर बैठे हैं, जिससे वहां काम शुरू नहीं कराया जा सकता है। किसानों के नेशनल हाईवे से उठने के बाद ही काम शुरू कराने की बात कही जा रही है, जिससे एक साल का समय नेशनल हाईवे का निर्माण पूरा होने में लगेगा।

ग्रामीण-वाहन चालक हो रहे परेशान

नेशनल हाईवे पर करीब एक लाख वाहन प्रतिदिन गुजरते हैं, लेकिन इस समय किसान आंदोलन के कारण वाहन कुछ कम हैं। इसके बावजूद नेशनल हाईवे से वाहनों की कतार खत्म नहीं होती। वहीं नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण का कार्य अधूरा पड़ा होने से आसपास के ग्रामीणों व वाहन चालकों को परेशानी उठानी पड़ रही है। कंपनी ने राई से पानीपत के बीच जिन फ्लाईओवर को शुरू कर दिया है तो उनके नीचे से वाहनों के निकलने के लिए रास्ता नहीं खोला गया है। इस कारण वाहन चालकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। हाईवे पार करने के लिए लोगों को आधा-आधा घंटा तक वाहनों के गुजरने का इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनकी जिंदगी को खतरा बना रहता है।

नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा था, लेकिन किसान आंदोलन के कारण राई से दिल्ली के बीच के पांच फ्लाईओवर पर कार्य भी शुरू नहीं हो सका है। जिस तरह के हालात है, उससे लग रहा है कि चौड़ीकरण का कार्य पूरा होने में एक साल से ज्यादा समय लगेगा। यह जरूर है कि अगर किसान आंदोलन नहीं होता तो इस साल के अंदर ही काम पूरा कर लिया जाता। – आनंद दहिया, तकनीकी मैनेजर, एनएचएआई

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